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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, Verses 11–12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 35, verses 11–12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 11,12

संस्कृत श्लोक

मुकुरे ह्यमलाभासे प्रतिबिम्बं प्रवर्तते । सदप्यग्रगतं वस्तु प्रतिबिम्बक्रिया विना ॥ ११ ॥ यथा नास्ति मलोपेते मुकुरे मुनिनायक । तथा नास्ति गतप्राणे विद्यमानेऽपि देहके ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

स्थूलदेहमात्र मे तो मलिनता होने से विति को अभिव्यक्त करने की सामर्थ्य नहीं है, इसका दृष्टान्त द्वारा उपपादन करते है। हे मुनिनायक, निर्मल आभासवाले दर्पण में किसी तरह की प्रतिविम्बक्रिया के बिना भी वस्तु का प्रतिबिम्ब पड़ता है और जैसे मलयुक्त दर्पण में सामने उपस्थित विद्यमान वस्तु का भी प्रतिबिम्ब नहीं पडता, वैसे ही देह के विद्यमान रहने पर भी प्राण के निकल जाने से उसमें चिति का प्रतिबिम्ब नहीं पड़ता