Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 35, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
संवेदनात्मकतया गतया सर्वगोचरम् ।
न तस्याह्वानमन्त्रादि किंचिदेवोपयुज्यते ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
समीप मे बैठाने के लिए आह्वान और प्रकाशन के लिए
मन्त्र आदि कुछ भी उसके लिए उपयुक्त नहीं होते, क्योकि वह सदा आहूत एवं सर्वत्र ही स्थित है,
अतएव अपने चैतन्यरूप से चारों ओर उपलब्ध हो जाता है