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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 36, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

गर्भीकृतमहामेरुं परमाणुसमं विदुः । आच्छादितमहामेरुं परमाणुसमं विदुः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

इसी कारण (अणोरणीयान्महतो महीयान्‌” (आत्मतत्त्व सूक्ष्मातिसूक्ष्म परमाणु से भी सूक्ष्मतम और बड़े से बड़े आकाश से भी बड़ा है () वह श्रुति उस आत्मतत्त्व मे अखिल विरुद्ध धर्मो का समावेश बतलाती है, इस आशय से कहते हैं। ब्रह्मन्‌, इस चितितत्त्व ने महान्‌ मेरूपर्वत को अपने उदर में समा लिया है और परमाणु के सदृश वह परमसूक्ष्म है ऐसा मुनि लोग कहते हैं । इसने महान्‌ मेरूपर्वत को ढक दिया है और परमाणु के सदृश अत्यन्त सूक्ष्म है ऐसा मुनि लोग कहते हैं