Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 36, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अकुर्वन्नेव संसाररचनां कर्तृतां गतः ।
कुर्वन्नेव महाकर्म न करोत्येव किंचन ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ न करते हुए ही उसने इस महान् संसार-रचना के प्रति कर्तृता प्राप्त की है और यह
बड़ा कर्म कर रहा भी कुछ करता ही नहीं