Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 36, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
बीजं समस्तबीजानां सारं संसारसंसृतेः ।
कर्मणां परमं कर्म चिद्धातुं विद्धि निर्मलम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, तुम इसी निर्मल चितितत््व को अखिल बीजों का भी बीज, संसाररूप सृष्टि का परम सार और
वेदोदित कर्मो में परम कर्म जानो