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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 37, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

नियतिर्नित्यमुद्वेगवर्जिताऽपरिमार्जिता । एषा नृत्यति वै नृत्यं जगज्जालकनाटकम् ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मन्‌,जब तक नियति तत्वबोध से परिमार्जित नहीं होती, तब तक सर्वविध उद्वेगो को छोडकर प्रतिदिन निरन्तर जगज्जालरूपी नाटकस्वरूप नाच नाचती रहती है