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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

चिद्रूपं सूर्यलक्षाभं समस्ताभासभासनम् । अन्तस्थचित्प्रकाशं स्वमहंतासारमाश्रयेत् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

चिद्रूप, लाखों सूर्यो के समान देदीप्यमान, सूर्य आदि समस्त प्रकाशक तेजो एवं बुद्धिवृत्तियों के अवभासक, अहम्भाव के सारभूत स्वस्वरूप यानी अहम्भाव के परित्याग से अवशिष्ट विशुद्ध आत्मस्वरूप तथा सबसे परे विद्यमान चित्प्रकाश का आश्रय करना चाहिए