Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
कर्मेन्द्रियाणि द्वाराणि बुद्धीन्द्रियगणैः सह ।
अयं सोऽहमनन्तात्मा व्यवच्छेदोज्झिताकृतिः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
अपनी
तरह दूसरों के भी प्रेम की विषय हुई ज्ञानशक्ति और प्राणशक्ति दो मेरी (जीवात्मा की) पत्नियाँ है ।
चित्र-विचित्र शास्त्रीय एवं लौकिक ज्ञान ही मेरे शरीरगत आभूषण हैँ । बाह्य प्रदेश में गमन हेतु होने से
ज्ञानेन्द्रिय -समूहों के साथ वाक् आदि कर्मेन्द्रियाँ ही मेरे घर के द्वार हैं ॥ २ ३॥ अपरोक्षरूप से प्रतीयमान
मैं (जीवात्मा) वही शिवस्वरूप हूँ, ओर परिच्छेदशून्य आकारवाला, अनन्तस्वरूप, सम्पूर्ण पदार्थो से
परिपूर्ण, अन्तर्यामी होने के कारण सब वस्तुओं का पूरक एवं अखण्ड अद्वितीयरूप होकर मैं स्थित
हूँ