Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
उपेक्षया करुणया सदा मुदितया हृदि ।
शुद्धया शक्तिपद्धत्या बोधेनात्मानमर्चयेत् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
कलह आवि के न होने में उपाय बतलाते हैं।
उपेक्षा से, दया से, हृदय में नित्य प्रसन्नता से, शुद्ध क्रोधादि के निग्रह की सामर्थ्य-पद्धति से और
ज्ञान से उस आत्मदेव की पूजा करे