Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
ईहितानीहितौघेन युक्तायुक्तमयात्मना ।
त्यक्तेनात्तेन चार्थेन ह्यर्थानामीशमर्चयेत् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
अयुक्तात्मा से छोड़े गये और युक्तात्मा से ग्रहण किये गये इष्ट-अनिष्ट
समूहरूप विषयों से विषयों के भोक्ता उस आत्मदेव की पूजा करे