Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 4, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 4, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

मन्ये मद्वचनैर्बोधमागतोऽसि रघूद्वह । विगताज्ञाननिद्रोऽन्तर्नृपतिः पटहैरिव ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हे रघुकुल के दीपक, अबमैं यह मानता हू किं आप मेरे वचनो से अज्ञाननिद्रा का त्यागकर आत्मज्ञानरूपी प्रबोध ऐसे प्राप्त किये हुए हैं, जैसे राजा बंदीजनों के वाद्यविशेषों से निद्रामुक्त होकर जाग्रत दशा प्राप्त करता है