Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 43, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
समः समसमाभासो भास्वद्वपुरुदारधीः ।
तिष्ठात्मार्चारतो नित्यं परिपूर्णं इवार्णवः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वयं सर्वविध वैषम्यों से निर्मुक्त, ब्रह्म
के साथ एकरस स्वरूपतापन्न जगद्रूप आभासो से युक्त, तेजस्वी-शरीर और उदार बुद्धि होकर
सदा आत्म-पूजन में तत्पर होते हुए आप समुद्र की नाई परिपूर्णरूप से स्थित रहिये