Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 45, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
योजनानां सहस्राणि विपुलं विमलं स्फुटम् ।
युगैरप्यजरद्रूपमस्ति बिल्वफलं महत् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, हजारों
योजन विस्तृत विमल स्पष्ट एक बहुत बड़ा विल्वफल है, जिसका स्वरूप युगो से भी जीर्ण-शीर्णं
नहीं हुआ है