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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 45, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

व्यूहमध्यमहामेरुं मन्दराद्रिरिवाचलम् । महाकल्पान्तवात्याया अपि वेगैरचालितम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

वह भुवन-समूहों के मध्य में स्थित मेरुपर्वत की नाई प्रधान स्तम्भ है, मन्दराचल की नाई दृढ़ है और महाप्रलय के प्रचण्ड वायु के वेग से भी चलित नहीं होनेवाला हे