Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 45, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
यस्य बिल्वफलस्योच्चैब्रह्माण्डानि समीपतः ।
हरन्ति लीलां शैलाधो राजिकाकणपद्धतेः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, वह ऐसा बिल्वफल हे कि जिसके समीप में उन्नत सभी ब्रह्माण्ड ऐसी शोभा धारण करते
हैं, जेसी पर्वतो के नीचे सूक्ष्मभूत सरसों के कणों की पंक्तियाँ शोभा धारण करती हैं