Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 47, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 47, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
नानाप्येकतयाऽनाना पद्मबिम्बं शिलोदरम् ।
यथा तदविभागात्म तथेदं चिद्धनान्तरम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि चिति से अविभक्तस्वरूप ही यह जगत् आदि है यानी
इसे चिति से पृथक् नहीं करते तो नाना होने पर भी एकमात्र चिति-शिला के भीतर स्थित हुआ वह
(जगत्) चैतन्यात्मा की एकता से उस प्रकार अद्वितीय हो जाता है, जिस प्रकार प्राकृत शिला के भीतर
का पद्म-विम्ब