Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तत्रैते यमचन्द्रार्कशक्राद्याः शंसितक्रमाः ।
भूतपञ्चकसंसारलोकपालत्वमागताः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
उन जीव-जातियों के बीच पांचभौतिक संसार में श्रुति,
स्मृति आदि से वर्णित चरित्रवाले यम, चन्द्र, सूर्य, इन्द्र आदि तत्-तत् लोक के अधिपति हो चुके
हैं