Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
एवं युगसहस्राणि व्यवहारशतानि च ।
समतीतान्यनन्तानि भूतानि च जगन्ति च ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
और यह भार उतारने के लिए अवतारादि-व्यवहार भी अनेक बार हो चुका है, यह कहते हैं।
श्रीरामजी, इस तरह हजारों युग, सैकड़ों व्यवहार तथा अनन्त जीव एवं जगत् व्यतीत हो चुके
हैं