Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
स्वप्नात्स्वप्नान्तरमिव गच्छन्तो जीवजीवकाः ।
असत्यमेव पश्यन्ति घनसत्यतयानघ ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्यरूप से अवलोकन किया करते हे