Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
यावदप्रतिबुद्धस्त्वमनात्मज्ञतया स्थितः ।
तावच्चतुर्भुजाकारदेवपूजापरो भव ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
पार्थ, जब तक तुम अप्रबुद्ध
होकर अनात्मज्ञरूप से स्थित हो तब तक तो चतुर्भुजाकार देव की पूजा में ही तत्पर रहो