Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
नानाकारविकारेषु तरङ्गेषु यथा पयः ।
कटकादिषु वा हेम भूतेष्वात्मा तथाऽर्जुन ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अर्जुन, नाना प्रकार के आकारो एवं विकारों वाले तरंगों में जैसे जल अनुगत है या कटक आदि में
सुवर्ण अनुगत है, वैसे ही विविध प्रकार के समस्त भूतों मे आत्मा भी अनुगत हे