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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

कलनाकर्मणि रते मनस्यपि महात्मनः । न कश्चिदत्राहमिति क्लेशभागे क एव ते ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

इस मन आदि अन्तःकरण संघात के संकल्पादिरूप अपने कार्य में तत्पर रहने पर भी "उसमें मेँ कोई नहीं हूँ” यों देख रहे तुम महात्मा की दृष्टि में ऐसा कोन पदार्थ क्लेशभाग में प्रविष्ट है, जिसके विषय मेँ तुम शोक कर रहे हो ? अर्थात्‌ कोई है ही नहीं