Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

स्पन्दमात्रार्थमेवाशु दृश्यन्ते नार्थकारिणः । तर्जनं गर्जनं मूढाद्धनुर्दण्डगुणादिव ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

उस प्रकार मूर्खतावश उत्पद्यमान परतर्जन या गर्जन चैतन्य का ज्ञापक है, किन्तु धनुष की डोरी के चढ़ाने की नाई मरण आदि अनर्थो का ही कारण है, यह कहते है । मूढतावश उत्पन्न होनेवाला चैतन्यज्ञान से शून्य परतर्जन या गर्जन धनुष के दण्ड में लगी हुई डोरी के सदृश केवल मरण के ही हेतु होते हैं