Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
भुक्तेन्दुखण्डकणिकानीलनीरदशैवले ।
स्वर्गमार्गसरस्यन्तः स्फुरन्ति सुरसा रसाः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
नील मेघरूपी सेवार से
युक्त, आकाशमार्ग में स्थित स्वर्गरूपी सरोवर में चन्द्रखण्ड की कणिका का उपभोग करनेवाले
देवतारूपी सारस पक्षी जो प्रस्फुरित होते हैं, वह भी अज्ञान का विलास है