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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

वराकी सृष्टिशफरी स्फुरन्ती भवपल्वले । कृतान्तवृद्धगृध्रेण शठेन विनिगृह्यते ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

संसाररूपी स्वल्प जलाशय में प्रस्फुरित हो रही सृष्टिरूपी विचारी क्षुद्र मछली को (सोरी नामक मछली को) शठ कृतान्तरूपी (काल) वृद्ध गीध जो पकड़ लेता हे, वह भी अज्ञान का विलास है