Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
पदार्थाम्भसि सर्वाणि फलफेनानि सर्वतः ।
पतन्त्यविरतापातमभाववडवामुखे ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
विनाशरूपी
बडवाग्नि के मुख में चारों ओर से सुख-दुःखात्मक फेनों से युक्त समस्त पदार्थरूपी जल अविरत
ताप से जो गिरते हैं, वह भी अविद्या-नटी का नृत्य है