Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 8, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
बृहत्पर्वतपर्वाढ्या ब्रह्माण्डत्वक्समावृता ।
देहयष्टिरियं यस्यास्त्रिलोकी लोककासिनी ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
यह कार्यअविद्यारूपी लता बड़े-बड़े मेरु आदि पर्वतरूप पर्वो (काण्ड की संधियों) से युक्त,
चिदावारक ब्रह्माण्डरूपी त्वचा से आवृत और जनरूपी पत्र, अंकुर आदि विकासों से युक्त है, ये तीनों
लोक इसकी देहयष्टि यानी अवयव संस्थान हैं