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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 80, Verse 75

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 80, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 75

संस्कृत श्लोक

एषामेकोऽभिसंकल्पः परमाणुर्महीपते । बीजमाकाशवृक्षाणां सर्गाणां तेष्विमानि तु ॥ ७५ ॥

हिन्दी अर्थ

यों अनन्त पंचकमेदों का वर्णन करके अव महाराज वक्तिष्ठजी-उनमे कर्मोपासनाओं के समूहो के अनुष्ठान के फलस्वरूप समष्ट्यहंभाव को प्राप्त हुए किसी एकका कोई एक संकल्पपरमाणु ही इस संसाररूपी आकाशवृक्षों का बीज है-यह बतलाते हैं। हे महीपते, समष्टिविषयक होने के कारण इन में किसी-एकका सर्वत्र अभिव्याप्त संकल्पात्मक कोई एक परमाणु ही सृष्टिरूपी आकाशवृक्षों का बीज है और उन सृष्टिरूपी आकाशवृक्षों में ही ये भूत पंचक हैं