Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 81, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
स्वप्नावलोकनं यद्वत्तद्वत्सिद्धावलोकनम् ।
केवलोऽथ विशेषोऽयं सिद्धप्राप्तौ स्थिरार्थता ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
सिद्धो का वह दर्शन (किस तरह का होगा” इस प्रश्नांश का उत्तर कहते हैं -
जिस तरह स्वप्न में पदार्थो का अवलोकन होता है उसी तरह सिद्धों का भी अवलोकन होता है
केवल स्वप्न की अपेक्षा विशेष यही है कि सिद्धों की प्राप्ति में संवाद, वरदान आदि फलरूप पदार्थों की
प्राप्ति होती हे