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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 83, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 83, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

जगामाकाशमार्गेण विवेशाम्बुधिकोटरम् । चचार वसुधापीठं गङ्गेवामलशीतला ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

मोहरूप कालिमा और तीनों तापों का उपशम (नाश) हो जाने से गंगा की नाई विमल ओर शीतल वह चूडाला कभी आकाश मार्ग से गमन करती थी, कभी समुद्र के कोटर में प्रवेश करती थी तथा अपनी इच्छा के अनुसार कभी इस पृथिवी के ऊपर विचरण करती थी