Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 9, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
सत्त्वजातौ देवयोनावविद्या प्राकृतैर्गुणैः ।
निर्मलं पदमायाताः सत्त्वं हरिहरादयः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
शिव आदि सत््वगुणान्तर्गत शुद्ध सत्त्वरूप हैं, इसमें युक्ति कहते है ।
सत्त्वजातिरूप देवयोनि में शिव, विष्णु आदि अविद्या के प्राकृत गुणों से कभी भी अविद्यारूप
आवरण को प्राप्त न होकर स्वाभाविक ही विद्या से स्व-स्वरूप पद को सदा ही प्राप्त हुए, अतः वे
शुद्धस त्त्वस्वरूप हे । इससे ब्रह्मा ओर शिव में राजस एवं तामसरूपता की मूर्ख मनुष्यों मे जो प्रसिद्धि है,
उसका खण्डन हुआ समझना चाहिए