Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 9, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तेन रुद्रादयो ह्येते सत्त्वभागा महामते ।
तिष्ठन्ति मुक्ताः पुरुषा यावद्देहं जगत्स्थितौ ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए शिवादि तीन मूर्तियों में आवरण न होने के कारण जीवन्मुक्तता स्वाभाविक है, इस
आशय से कहते है।
हे महामते, उक्त हेतु से शुद्ध सत्त्वगुण के अंशभूत रुद्र आदि पुरुष (देवता) जगत्स्थितिकाल में,
जब तक देह धारण किये रहते हैं, तब तक मुक्त होकर स्थित रहते हैं