Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 91, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 91, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
यत्खातवलयो बाललताभिरवगुण्ठितः ।
आवृतं तत्तपोदुःखमीषत्सज्जनवृत्तिमिः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
*उपर्यस्थगयद्बाललतौघेन स तं शठः“ (उस कवक महावत ने उस गड्ढे को कोमल बाललताओं
से उस प्रकार ऊपर से ढक दिया) इसका स्पष्टरूप से तात्पर्य कहते हैं।
कोमल लताओं से जो गोल गड्ढा ढका है वह आपका तपोदुःख ही शान्ति आदि गुणों ओर सज्जनों
के समागमों से थोड़ा-सा आवृत्त है