Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 92, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 92, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
शिखिध्वज उवाच ।
एतच्चेन्मम नो सर्वं तत्सर्वं स्वाश्रमो मम ।
वापीस्थलोटजयुतस्तमेवाशु त्यजाम्यहम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि त्याग करने क कारण वन आदि आपके सव हैं नहीं, यह मैं मानता हूँ, तथापि आश्रम का
अस्तित्व होने से आपका सर्वत्याग सम्पन्न हुआ कैसे, यह कुम्भ मुनि अब मुझसे कह रहे हैं, यो मान रहे
राजा शिखिध्वज कहते हैं।
त्याग के कारण यदि ये वन आदि मेरे सब नहीं हैं तो यह जो वापी, स्थल, पर्णकुटी आदि से
युक्त मेरा अपना आश्रम तो सब कुछ है, उसका भी अभी मैं त्याग कर देता हूँ