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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

शास्त्राविलवनं कुर्वन्मूलकाषे भरं कुरु । शिखिध्वज उवाच । चित्तद्रुमस्य शाखादेः कुर्वाणोऽहं विकर्तनम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

अव शाखाओं के छेदन और मूल के छेदन मे उपाय पूछते हैं। राजा शिखिध्वज ने कहा : हे मुने, चित्तरूपी वृक्ष की शाखा आदि का छेदन कर रहा मैं उसके मूल का अशेषरूप से छेदन किस तरह करूँ