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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

शिखिध्वज उवाच । स्वरूपं वेद्मि चित्तस्य वासनामयमाकुलम् । त्यागः स मन्ये दुःसाध्यो वज्रनिर्गिलनादपि ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा शिखिध्वज ने कहा : हे मुने, आपके वचन से चित्त का स्वरूप वासनामय तथा विविध उपद्रवोषपादक है, यह तो जानता हूँ, परंतु उसका परित्याग वजर को निगल जाने की अपेक्षा भी अत्यंत दुष्कर मानता हूँ, क्योकि मूर्खता की स्थिति में उदासीनता का अवलम्बन किसी तरह हो ही नहीं सकता