Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 96, Verses 32–33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 96, verses 32–33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
परेऽसद्देशकालान्ते तथा जगदकारणम् ।
शिखिध्वज उवाच ।
जलादौ यत्तरङ्गादि तत्सकारणमस्ति हि ॥ ३२ ॥
परे जगदहंतादि नाकारणमवैम्यहम् ।
कुम्भ उवाच ।
इदानीं तत्त्वतो ज्ञातमेतत्सत्यं महीपते ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
"जलेस्ति देशकालान्ते“ इत्यादि जो पहले कहा गया था, उसीका आपने यहाँपर उपसंहार किया,
परन्तु उसमें ऊपर नीचे उक्ति का जो वैषम्य आपने किया है, उसका तात्पर्य क्या है, यो राजा पूछते हैं ।
राजा शिखिध्वज ने कहा : मुनिश्रेष्ठ, जल आदि में जो तरंग आदि हैं, वे तो सकारणक हैं, यह मैं
मानता हूँ, परन्तु यह नहीं मानता कि परब्रह्म मे अहन्ता आदि जगत् अकारणक है