Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 1, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
बहुनात्र किमुक्तेन संक्षेपादिदमुच्यते ।
संकल्पनं मनोबन्धस्तदभावो विमुक्तता ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, अब इस विषय में और अधिक कहने की आवश्यकता नहीं है । संक्षेप में
यही कह देता हूँ कि संकल्प ही मन का बन्धन है ओर उसका अभाव ही मुक्ति है