Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 1, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
पश्यन्कर्मण्यकर्मत्वमकर्मणि च कर्मताम् ।
यथाभूतार्थचिद्रूपः शान्तमास्व यथासुखम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
सांसारिक सब कार्य निष्क्रिय ब्रह्मरूप हैं और निष्क्रिय ब्रह्मभाव में स्थिति अवश्य
करना चाहिए - यों देखते हुए आप परमार्थ चैतन्यरूप होकर सुखपूर्वक शान्त बैठे रहिये