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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 10, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 10, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

अतः शिलोदराभोऽसि व्योमकोशोपमोपि च । ब्रह्मैकघनरूपत्वादजोऽनवयवोऽसि च ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए हे विद्याधर, तुम शिला के उदर के समान तथा आकाशकोश के सदृश हो । ब्रहौकघनस्वरूप होने के कारण तुम अज और अवयवरहित भी हो