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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 101, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

संविन्मात्रादृते तस्माद्भूतं किमिव कथ्यताम् । कथ्यतां म्रियते तच्चेत्तदद्येमे कुतो वयम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

कहिये, उस संवित्‌ के अतिरिक्त नित्य सद्वस्तु क्या है ? और आप यह भी कहिये कि यदि वह मरती है, तो फिर आज ये हम लोग जी कैसे रहे हैं ?