Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 14
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हिन्दी अर्थ
यदि केवल चिदाकाश ही प्रतीत होता है, तो सब लोगों को द्वश्य” रुपये किसका बोध होता
है ? इस प्रश्न पर कहते हैं /
यह आभासमात्र (विवर्तमात्र) दृश्य" रूप से लोगों को ज्ञात होता है । दृश्य" रूप से ज्ञात हो
रहे इस शुक्तिरजत्, मरुनदी, आदिरूप विश्व की चिदाकाश के बिना क्या कहीं सत्यता दिखाई
दी ?