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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 63

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 63

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

उस परम पद में कार्यकारण भावादि नहीं है, बकवास के कारण जो उसमें कार्य- कारणभावादि की कल्पना की जाती है, वह निरी मूर्खता है ॥६ २॥ सहकारी ओर निमित्त कारण के अभाव में कारण से (उपादान कारण से) कार्य की उत्पत्ति नहीं होती सहकारी और निमित्त कारण के अस्तित्व में होती है, यह बात बच्चों तक विदित है