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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 65

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 65

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

इसीसे परमाणुकारणवादी बोद्ध आदि के मत का खण्डन हो गया / कारण कि अतीन्द्रिय (इन्धियगोवर) परमाणुसमूह इन्द्रिययोचर नहीं देखा जाता, ऐसा कहते हैं । जो बुद्ध आदि लोग परमाणुओं का समूह ही जगत्‌ है, ऐसा कहते हैं उनका कथन वास्तविक नहीं है, जैसे कोई खरगोश का सींग धनुष के तुल्य है, ऐसा कहे वैसे ही यह भी अज्ञान से कहा जाता है