Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 21
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हिन्दी अर्थ
चिदाकाश के लक्षणों के निरृपएणकर उसकी अद्वितीयता की सिद्धि के लिए।विश्व की तन्मयता
दशती हैं ।
बाह्य विषय भोगों ओर आभ्यन्तर विषयभोगों से युक्त तथा इस प्रकार का यथाभूत तथा
यथास्थित यह सारा का सारा विश्व चिन्मय ही है