Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 26
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हिन्दी अर्थ
कारण के अभाववश यह सृष्टि के प्रारम्भ में उत्पन्न ही नहीं हुआ । क्योंकि
कारण के अभाव में कार्य की उत्पत्ति हो ही नहीं सकती