Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 59

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जब अल्पशक्तिवाले कल्पदुम आदि भी सकल्पित वस्तुओं की कल्पना करने की शक्ति रखते हैं तब सर्वशक्तिमान्‌ परमात्मा मे उक्त शक्ति हैं, इसमें कहना ही क्या है 2 इस आशय से कहते हैं / जैसे कल्पवृक्ष अभीष्ट फल देता है और जैसे चिन्तामणि मन चाही वस्तु देती है वैसे ही चिति भी जिस वस्तु की मन में भावना की जाय, उसकी तत्क्षण पूर्ति कर देती है