Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अखण्डितैर्मया नीतं पीतातियशसा वयः ।
इदानीं शष्पविश्रान्तप्रालेयभरभासुरम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
गुप्तचर ने कहा : महाराज, उत्तर दिशा के अधिनायक (आपके सामन्त) शत्रुओं द्वारा
आक्रान्त होकर जिसका बाँध टूट गया ऐसे जलप्रवाह के समान सेना सहित इधर ही आ रहे
हैं