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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

लुठत्पटनकुट्टाकसाटोपस्फुटपट्टिशम् । खे वटत्केतुपट्टाट्टपटत्पटपटारवम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

स्नान करने के उपरान्त राजा ने अग्निगृह में प्रवेश किया और विधिपूर्वक श्रद्धा से अग्नि की पूजाकर निम्नलिखित बातों पर विचार किया