Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 111, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
रथाम्भोधरनिर्ह्रादैर्दिवि भूमौ घनारवैः ।
चतुर्दिक्कं घनं तारक्रेंकारस्य चतुष्टयैः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त शूरवीर योद्धा कटे हुए सुन्दर सुन्दर
हाथीरूप कमलों से भरी हुई युद्ध भूमि के आकाश में तालाब में सारसों के समान सुशोभित
हुए